फसलें और त्यौहार

[देवेन्द्र मेवाड़ी जी द्वारा सुनाये गये कई किस्से आप पढ़ चुके हैं हाल ही में उन्होंने गोरु बाछों के बारे में हमार गोरू-बाछ और चिंगोरे हुए हाथ.. , ब्वाँश, बाघ, मूना और “पैजाम उतार पैजाम”…. , बेचारा गुजारा … , गाय-भैंस का ब्याना और बिगौत का खाना.. जैसे किस्से सुनाये। फसलों और त्यौहारों की कहानी का पहला भाग आप पढ़ चुके है। आज प्रस्तुत है दूसरा व अंतिम भाग : प्रबंधक]

pongalउधर दक्षिण भारत में फसलों के स्वागत में ‘पोंगल’ का त्योहार मनाया जाता है। नए बर्तन में ताजा दूध और गुड़ मिले चावलों के उबलते ही लोग खुशी से चिल्लाते हैं- पोंगालो पोंगल! नया उबला चावल सूर्य व प्रकृति को चढ़ाते हैं और खुद भी उसका भोग लगाते हैं। पोंगल के तीसरे दिन खूब गन्ना चबाते हैं। महाराष्ट्र में बिना बेलन लगाए बाजरे की भाखरी पकाते हैं। मध्य प्रदेश के कई भागों में ज्वार के पूरे पौधों से सजा कर ‘ग्यारस’ बनाते हैं। बीच में बाल गोपाल को सजा कर गन्ना, आंवला, बेर और फूल चढ़ाते हुए कामना करते हैं- “बेर फली आंवला, उठो देव सांवला!” घर-घर में हलवा, पूड़ी, खीर बनती है।

और, दोस्तो, केरल का ‘ओणम’ त्योहार भी हम फसलों की कटाई का त्योहार है। इसमें लोग दस दिन तक खुशियां मनाते हैं और ओणम के खास ज्योनारों का आनंद उठाते हैं। ओणम की पहचान है दिन के भोजन की शानदार दावत- Onam-Food-variety‘साध्या’। यह शाकाहारी दावत होती है और केवल हम फसलों से बनती है। इतने ज्योनार, इतने व्यंजन बनते हैं कि तुम गिनते रह जावोगे! केले के पत्ते पर एक सिरे से दूसरे सिरे तक सजे एक से एक स्वादिष्ट व्यंजन….चावल, तरह-तरह की रसदार सब्जियां, दालें, पापड़म, दही, मट्ठा, केले की चिप्स और मीठे व्यंजन। साध्या में प्याज-लहसुन नहीं पड़ता। कुछ व्यंजनों का जरा जायजा तो लो- चावल के साथ मसूर की दाल का ‘परिप्पू’। मसूर, इमली, नारियल, टमाटर, सौंफ और सहजन की फलियों का ‘साभंर’। इमली, टमाटर, काली मिर्च, सौंफ, धनिया, मिर्च का ‘रसम’। दही, नारियल, एक सब्जी का ‘कालन’। कद्दू, नारियल दूध, नारियल तेल में अदरक का ‘ओलान’। दो सब्जियों की तीखी-मीठी ‘कूट्टूकरी’। अदरक, इमली, हरी मिर्च, गुड़ की तरी ‘इंजिपुली’। भुनी सब्जियों, सेम, मटर, कटहल, गाजर, कसे नारियल का ‘थोरन’। अचार। चीनी या गुड़ और नारियल दूध या दूध का गाढ़ा मीठा ‘प्रधामन’! कभी ओणम की दावत में जाने का मौका मिले तो इन व्यंजनों की गिनती करना, लेकिन इन्हें खाना मत भूल जाना।

baisakhi-celebrationsदक्षिण भारत से चलो पंजाब की ओर आते हैं। तुम्हें ढोल की आवाज सुनाई दे रही है? वह देखो, मेरे खेतों में खुशी से भांगड़ा नाचते हुए लोग। ढोल के बोल और उन लोगों के सुरों को सुन कर देखो मेरी गद्राई फसल कैसे झूमने लगी है। दोस्तो, बैसाखी आ गई है। यह भी कटाई का बड़ा त्योहार है। बैसाखी की दावत में मक्की की रोटी और सरसों का साग चखोगे तो तुम भी ‘बल्ले-बल्ले’ कह उठोगे।….दोस्तो, मुझे दूर असम के ढोल भी सुनाई दे रहे हैं। वहां असमी नव वर्ष शुरू हो गया है। धान बोने के लिए किसान खेतों की तैयारी कर रहे हैं और सभी लोग रंगोली ‘बिहू’ का त्योहार मना रहे हैं। बिहू के गीत गाते हुए वे घर-घर जाकर अच्छी फसल की कामना के गीत गा रहे हैं। बिहू नृत्य कर रहे हैं। महिलाएं बिहू के मौके पर विशेष रूप से चावल और नारियल का ‘पीठा’ और ‘लारस’ बना रही हैं।

ghewar-rajasthanराजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में सावन के महीने में जब वर्षा की फुहारें पड़ती हैं तो बहू-बेटियां झूलों पर झूलती हैं। वे घेवर और फीनी की मिठास का आनंद उठाती हैं। भाई अपनी बहिनों के लिए मैदे, दूध, देशी घी और बूरे से बने घेवरों की सौगात ले जाते हैं।

तो दोस्तो, इस तरह त्योहार आते हैं और खुशियों के साथ-साथ तुम्हारे लिए भी ज्योनारों की सौगात लाते हैं। ये ज्योनार हमसे बनते हैं- हमारे बीजों से, फल-फूलों से, कंद-मूलों से। कंद-मूल से चौंक गए ना? अरे भई, शिवरात्रि हो या जन्माष्टमी, या फिर नवरात्र का त्योहार। इनमें भी हमारे ही कंद-मूलों से बनता है फलाहार। ठीक है ना? तो चलो, तुम्हारे साथ हम भी मनाएं त्योहार की खुशियां। हमारे ज्योनार खा कर जब तुम्हारे चेहरे पर खुशी दिखाई देगी तो हम सब भी तुम्हारी खुशी में शामिल हो जाएंगी।

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3 Thoughts to “फसलें और त्यौहार”

  1. बहुत अच्छा लिखा है सर जी आनंद आ गया

    सुक्रिया

  2. basant bhatt

    sunder ati sunder.

  3. लेख पढकर आनन्द आ गया. लेख का शीर्षक “त्यौहार,फसलें और व्यंजन” ज्यादा जमता.

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